हरियाणा में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने वाली एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गए हैं। पिछले 8 साल के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को बचाने के लिए ब्यूरो समय पर कोर्ट में चार्जशीट देक पेश नहीं कर रहा। इसका सीधा फायदा भ्रष्ठी को डिफॉल्ट बेल के रूप में मिल रहा है।
भास्कर टीम की पड़ताल में सामने आया कि 1 जनवरी 2018 से 31 दिसंबर 2025 तक प्रदेश में भ्रष्टाचार के कुल 909 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 340 केस ऐसे हैं, जिनमें चार्जशीट पेश नहीं हुई। पुलिसर विभाग के खिलाफ 334 केसों में से 101 (30.2%) में चार्जशीट पेश नहीं की गई।वहीं, दूसरे विभागों के पटाय के 110 केसों में से 84, बिजली कर्मचारियों के 109 में से 95 और तहसील कर्मियों के 20 में से 15 मामलों में मुस्तैदी से चार्जशीट पेश की गई। यह दर 81% से अधिक है।
