फरीदाबाद। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर जीवन की अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना उपभोक्ता की मौजूदगी और किना तचित प्रक्रिया अपनाए तैयार की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर बनाया गया चिजली बिल कानूनी रूप से मान्य नहीं हो सकता। इसी आधार पर अदालत ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को अपील खारिज कर दी।
अदालत में दावर दावे के अनुसार कंपनी को मई 2017 में करीब पांच लाख 82 हजार रुपये का बिजली बिल जारी किया गया था। कंपनी ने सिविल अदालत में दावा किया कि यह बिल बिना आधार के है और मीटर नियमित जांच में सही पायाअदालत ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की अपील की खारिज
गया था।
