जिले में वायु प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर एक बार फिर दिखावा बनाम हकीकत की तस्वीर साफ नजर आ रही है।
कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल द्वारा एंटी स्मोक गुन मशीनों, वॉटर टैंकरों और स्वीपिंग मशीनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किए जाने के बाद भी शहर की हवा में कोई सुधार नहीं दिख रहा। जमीनी सच्चाई यह है कि एंटी स्मोकगन मशीनें या ती बंद पड़ी हैं या फिर केवल नगर निग कार्यालय के आसपास तक ही सीमित रह गई हैं, जबकि शहर की प्रमुख सड़कों पर धूल और धुएं का आलम जस का तस बना हुआ है।
