हरियाणा सरकार ने सीवरेज सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जुड़े टेंडरों में बड़ा और सख्त बदलाव करते हुए ठेकेदारों की दीर्घकालिक जवाबदेही तय कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब ठेकेदार केवल निर्माण कार्य पूरा कर भुगतान नहीं ले सकेंगे, बल्कि निर्धारित अवधि तक प्लांट के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग की ओर से जारी विशेष शर्तों में सुरक्षा राशि, डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (डीएलपी) और परफॉर्मेंस बैंक गारंटी (पीबीजी) के नियमों में व्यापक बदलाव किया गया है। सरकार का तर्क है कि पिछले वर्षों में कई स्थानों पर एसटीपी तो बने, लेकिन रखरखाव में ढिलाई के कारण वे पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पाए। इससे सीवरेज ओवरफ्लो, गंदगी और प्रदूषण की शिकायतें बढ़ीं। नई नीति का उद्देश्य है।
