तिगांव। खेड़ी पुल के पास नहार किनारे लगी सुरक्षा दीवारें, जिन्हें तकनीकी रूप से पैरापेट वॉल या सेफ्टी रेलिंग कहा जाता है. हटे होने से बड़ा हादसा होने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है। इन दौकरी का मुख्य उद्देश्य राहगीरों और वाहन चालकों को नहर में गिरने से रोकना होता है, लेकिन मौजूदा हालात में ये सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से नदारद दिखाई दे रही है। हाल ही में नोएडा में नहर से जय एक हादसे में एक इंजीनियर की मौत का मामला सामने आने के बाद स्थानीयलों में चिंता और भी गहरा गई है।
इसी कड़ी में खेड़ी रोड व्यापारी एकता संगठन ने इस मुद्दे सामने जोरदार ढंग से आवाज उठाई है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा दीवारें दोबारा नहीं लगाई गई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता खेड़ी पुल क्षेत्र से रोजाना सेंत्र हो वाहन और पैदल राहगीर गुजरते हैं। रात के समय रोशनी कम होने और नहर के पास किसी तरह की ठोस वैरिकेडिंग ने होने के कारण जोखिम बारिश के दिनों में खतरनाक हो जाते हैं। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि कई बार इस बारे में संबंधित विभागों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
