आम आदमी पार्टी के ‘लालाजी’ इन दिनों राजनीतिक तौर पर कुछ निष्क्रिय नजर आ रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से उनकी संक्रियता में साफ कमी दिखती है। दिल्ली की सत्ता गंवाने के बाद हरियाण में भी पार्टी की धार कुंद पड़ी है। बिजनेसमैन-कम-नेता सेठजी राजनीति में हर कदम नफा-नुकसान तौलकर रखते हैं। पार्टी के मौतर कई ‘प्रेमी प्रधान की कुर्सी की ओर देख रहे हैं, लेकिन फिलर वाले नेताजी फिलहाल फुल एक्टिव मोड में नही है। ऐसे में पार्टी में जो चल रहा है, उसे SP चलने देने की नीति अपनाई जा रही है, कम से कम अभी के लिए।
