नई दिल्ली, मैद्रः सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी आवासीय परियोजना की सामान्य सुविधाओं के रखरखाव और प्रबंधन के लिए गठित होमबायर्स की मेंटेनेंस सोसायटी या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) रियल एस्टेट डेवलपर के खिलाफ चल रही दिवाला कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। अदालत के अनुसार ऐसी संस्थाओं को इनसाल्वेंसी प्रक्रिया में पक्ष बनने का वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
न्यायमूर्ति जेबी पार्टीकला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने तक्षशिला हाइट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में इनसाल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आइबीसी), 2016 के तहत जारी कार्यवाही को बरकरार रखते हुए यह महत्वपूर्ण व्यवस्था दी पाल ने कहा कि यदि कोई पक्ष सोडली उसका मूल उद्देश्य कारपरिंट देनदार का पुनरुद्धार होना चाहिए, न कि इसे केवल बकाया वसूली के शार्टकट के रूप में इस्तेमाल किया जाए।
