फरीदाबाद नगर निगम अपनी अजीबो गरीब कार्यशैली के लिए हमेशा चर्चाओं में रहता है. इन दिनों एक नया मामला खासी सुर्खियों में कि नगर निगम ने पुराने सफाई के टेंडर पर न तो काम कराया और न उसको कैंसल ही किया, और उसके जगह नया टैंडर कर दिया। अब टेंडर लेने वाला ठेकेदार में निगम के खिलाफ याचिका लगा दी है कि जब निगम को यह काम कराना ही था और उसको टैंडर दिया था तो उसको क्यों नहीं करने दिया और जब उसको उक्त काम का टैं टेंडर दे रखा था तो नया टैंटी क्यों किया गया? अब चचा यह है कि कोर्ट ने यदि इस मामले में टेकेर विग के अनुरूप कोई भी दंड लगा दिया तो उसका जिम्मेवार कौन होगा,
क्या इसशुमले में ऐसा क्या गोलमाल है कि निगम अधिकारी केवल टेंडर करने पर जोर देत काम कराने में रुचि नहीं रखते और क्या निगम में इतनी अराजकता है कि आधिकारियों को लगे रहते हैं चाहे काम हो या न हो? असल में फरवरी 2025 में निगम ने क्षेत्र के व्यवसायिक क्षेत्रों जैसे मार्केट इत्यादी में रात को सफाई के लिए एक साल की अवधि के लिए लगभग पांच करोड रुपए की लागत के चार टैंशर छोडे जो कि एक ठेकेदार ने ले लिए, लेकिन आज तक इस टैंडर पर काम नहीं हुआ, क्योंकि अधिकारियों ने कभी ठेकेदार को काम करने की इजाजत ही नहीं दी, लेकिन अब जबकी इस टैंडर में एक माह से अधिक का समय शेष था
