फरीदाबाद: सीनियर सिटिजन एक्ट के तहत बुजुर्गों के संपत्ति और भरण पोषण विवादों का निपटारा करने वाले जिले के मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल और अपीलेंट ट्रिब्यूनल पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लगातार दो मामलों में टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कहा कि ट्रिब्यूनल का गठन नियमों के अनुसार नहीं था, इसलिए अकेले एसडीएम और डीसी द्वारा सुनाए गए आदेश कानूनी रूप से वैध नहीं माने जा सकते। इन मामलों को दोबारा सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल के पास भेजा गया है। पहला मामला राजवंत कौर द्वारा दायर किया गया था। इस याचिका में वर्ष 2016 में एसडीएम, मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल फरीदाबाद और वर्ष 2017 में डिप्टी कमिश्नर-कम-अपीलेट अथारिटी द्वारा पारित आदेशों को गई थी।
लेकिन आदेश अकेले अधिकारियों ने पारित किए। ऐसे में पूरा आदेश “कोरम नोन ज्यूडिस” हो गया। दूसरा मामला प्रेमवती द्वारा दायर किया गया, जिसमें भी लगभग यही स्थिति सामने आई। इस मामले में भी याचिकाकर्ता ने दलील दी कि 2016- ट्रिब्यूनल व अपीलेंट ट्रिब्यूनल पूर्ण सदस्यीय नहीं थे। आदेश नियमों – के विपरीत सुनाए गए। हाई कोर्ट ने इसमें भी ट्रिब्यूनल के आदेश रद
