हरियाणा सरकार अब गावा की टूटी, अधूरी और विभागों की बोक्तान में फंसी सड़कों पर – बड़ा प्रशासनिक ऑपरेशन करने की तैयारी में है। वर्षों से ग्रामीणों के गुस्से और परेशानी का कारण बनी ‘डबल कंट्रोल’ व्यवस्था को खत्म करने के लिए सरकार बड़ा रोड रिफॉर्म प्लान तैयार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक हरियाणा एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के अधीन आने वाली पांच करम तक की ग्रामीण सड़कों को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को 2 सौंपने पर मंथन शुरू हो चुका है।
हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से सबसे बड़ी समस्या सड़क निर्माण की बंटी हुई जिम्मेदारी रही है। कई गांवों में एक सड़क का आधा हिस्सा पीडब्ल्यूडी के पास होता है, जबकि बाकी हिस्सा मार्केटिंग बोर्ड के अधीन आता है। नतीजा यह निकलता है कि सड़क निर्माण और मरम्मत का काम समय पर पूरा ही नहीं हो पाता। कई बार पीडब्ल्यूडी अपने हिस्से की सड़क बना देता है, लेकिन जैसे ही मार्केटिंग बोर्ड का हिस्सा शुरू होता है, वहां काम रुक जाता है। बजट मंजूरी, टेंडर प्रक्रिया और फाइलों की लंबी दौड़ के कारण महीनों तक सड़कें अधूरी पड़ी रहती हैं। कहीं सड़क चमचमाती दिखती है तो कुछ मीटर आगे गड्डों और टूटी परतों का साम्राज्य शुरू हो जाता है। बरसात के दिनों में तो हालात और भी खराब हो जाते हैं।
